फेसबुक पेज पर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का खुलासा “किसान आंदोलन को फीका करने के लिये बीजेपी ने राजस्थान के पंचायतीराज चुनाव परिणामों का झूठ फैलाया”

वीरधरा न्यूज़। चित्तौड़गढ़ @ श्री दुर्गेश लक्षकार

पंचायतीराज 2020 राजस्थान में आये जिला परिषद और पंचायत समिति चुनावों के परिणाम को लेकर बीजेपी हाईकमान के आदेश पर किसान आंदोलन को फीका करने के लिये केंद्रीय मंत्रियों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर झूठ फैलाया है। भाजपा इन नतीजों को अपनी बड़ी जीत की तरह प्रदर्शित कर रही है जो आंकड़ों के विश्लेषण में गलत साबित होता है।
21 जिलों की 222 पंचायत समितियों पर हुये मतदान में से कांग्रेस को भाजपा से ज्यादा मत मिले हैं। कांग्रेस को 40.87% वोट मिले हैं जबकि बीजेपी को 40.58% वोट ही मिले हैं। कांग्रेस को बीजेपी से 0.29% ज्यादा वोट मिले हैं। 222 पंचायत समितियों में बीजेपी और कांग्रेस के बराबर 98-98 और अन्य पार्टियों के 26 प्रधान चुने गये हैं। 2015 में इन पंचायत समितियों में बीजेपी के 112 और कांग्रेस के 67 प्रधान थे। कांग्रेस के प्रधानों की संख्या पहले से 31 बढ़ी है जबकि बीजेपी के प्रधानों की संख्या 14 कम हुई है।
2015 में इन 21 जिला परिषदों में बीजेपी को 48.87% वोट मिले थे लेकिन इस बार सिर्फ 43.81% वोट ही बीजेपी को मिले हैं जो पिछली बार से 5 प्रतिशत कम हैं। कांग्रेस को 42.76% वोट प्राप्त हुये हैं जो बीजेपी से महज 1.05% प्रतिशत कम है। 2019 के लोकसभा चुनावों से तुलना करें तो इन जिलों वाली लोकसभा सीटों पर बीजेपी को लगभग 61.05% वोट मिले थे। लोकसभा चुनाव से जिला परिषद चुनावों के 18 महीनों में बीजेपी का वोट करीब 18 प्रतिशत प्रतिशत कम हुआ है।
2015 में बीजेपी के इन 21 जिलों में 14 जिला प्रमुख थे लेकिन इस बार बीजेपी के 13 जिला प्रमुख बन सके हैं। इन 21 जिला परिषदों में से बीजेपी 2015 की तुलना में सिर्फ 5 जिला परिषदों में पिछली बार से ज्यादा वॉर्ड जीत पाई है। बाकी 16 जिला परिषदों में उसके जीते गये वॉर्डों की संख्या 2015 से कम है।
कोरोना महामारी के दौरान राजस्थान सरकार का पूरा ध्यान महामारी की रोकथाम पर था। इसलिये कांग्रेस ने प्रदेश स्तर और केंद्रीय स्तर के नेताओं को इन चुनावों में प्रचार करने के लिये नहीं भेजा जिससे भीड़ इकट्ठा ना हो और इस महामारी का फैलाव रुक सके। वहीं भाजपा के केंद्रीय मंत्री तक इन चुनावों में प्रचार के लिये उतर गये। केंद्रीय मंत्री श्री गजेंद्र सिंह शेखावत, श्री कैलाश चौधरी, श्री अर्जुन मेघवाल, नेता प्रतिपक्ष श्री गुलाब चंद कटारिया, उप नेता प्रतिपक्ष श्री राजेंद्र राठौर समेत कई नेताओं ने चुनाव प्रचार में कोरोना के नियमों की जमकर धज्जियां उड़ाईं और अपनी राजनीति के लिये आमजन के जीवन को खतरे में डाला।
जब हमारे प्रदेश के 2500 लोग और दो विधायक कोरोना के चलते अपनी जान गंवा चुके हैं तब हम सबकी जिम्मेदारी है कि कोरोना संक्रमण को गंभीरता से लिया जाये। लेकिन भाजपा के नेताओं ने कोरोना संक्रमण का ध्यान नहीं रखा। चुनावों में जीत के लिये भाजपा नेताओं ने आमजन के सामने कोरोना प्रॉटोकोल तोड़ने का गलत उदाहरण पेश किया।
जब हमारा सारा ध्यान जीवन और आजीविका बचाने पर था तब भाजपा नेताओं के लिये राजनीति जरूरी थी। हैदराबाद के नगर निगम चुनावों में बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों का जाकर कोरोना प्रॉटोकोल का उल्लंघन करना इनकी सोच दर्शाता है। यह दिखाता है कि भाजपा चुनाव जीतने के लिये आमजन के जीवन से भी समझौता कर सकती है।
भाजपा के केंद्रीय और प्रदेश के नेताओं ने चुनाव नतीजों को भ्रामक रूप से मीडिया के सामने प्रचारित कर ऐसा हौआ खड़ा करने की कोशिश की जैसे कांग्रेस का सफाया हो गया हो। राजस्थान के किसानों ने भाजपा को 18 महीनों में 18 प्रतिशत कम वोट देकर किसान आंदोलन का साथ दिया है। राजस्थान के किसान पूरी तरह नये कृषि कानूनों के खिलाफ हैं इसलिये उन्होंने भाजपा के विरोध में वोट किया है।