नाबालिक का अपहरण कर दुष्कर्म के मामले में चित्तौरगढ़ न्यायालय ने पोक्सो एक्ट में 10 साल की सजा सुनाई

चित्तौडगढ़।
लेगिंक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम 2012 न्यायालय (पोक्सो कोर्ट ) की पीठासीन अधिकारी ने नाबालिग के अपहरण एवं दुष्कर्म के मामले में अभियुक्त को दोषी पाया है। न्यायालय ने अभियुक्त को अलग-अलग धाराओं में 10 वर्ष का कठोर कारावास व 23 हजार रुपए जुर्माना सुनाया। लोक अभियोजक के अनुसार 30 अक्टूबर 2017 को शहर कोतवाली चित्तौडगढ में नाबालिग किशोरी की मां ने शिकायत दर्ज कराई कि उसकी 16 वर्षीय पुत्री सुबह 10 बजे विद्यालय गई थी, जो वापस नहीं लौटी। इसके साथा ही शिकायत में चामटीखेड़ा निवासी निलेश मीणा पिता रामचन्द्र मीणा, शांति बाई, रेखा और कुलदीप पर शंका जताई थी। इस संबंध में कार्रवाई करते हुए कोतवाली थाना पुलिस ने करीब 2 माह बाद किशोरी को उदयपुर क्षेत्र में नीलेश मीणा के कब्जे से दस्तयाब कर लिया। किशोरी ने अपने बयान में बताया कि निलेश उसे अपनी दोस्ती को सार्वजनिक करने की धमकी देकर बाइक से अपहरण कर ले गया था और बाद में उदयपुर में किराये का मकान लेकर रहने लगा था। पुलिस ने प्रकरण का अनुसंधान पूर्ण कर आरोप पत्रन्यायालय में पेश किया। इस दौरान अभियोजन पक्ष की तरफ से 16 गवाह 22 दस्तावेज प्रस्तुत किए गए। दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद न्यायाधीश ने मुख्य आरोपी निलेश मीणा को नाबालिग के अपहरण व दुष्कर्म का दोषी मानते हुए धारा 363 के तहत 3 वर्ष का कठोर कारावास और 3 हजार रुपए का जुर्माना, धारा 366 के तहत 5 वर्ष का कठोर कारावास और 5 हजार रुपये का जुर्माना एवं पोक्सो एक्ट की धारा के तहत 10 वर्ष का कठोर कारवास और 15 हजार रुपए के जुर्माने की सजा से दण्डित किया है।

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