वीरधरा न्यूज़।बौंली/ बामनवास@ श्री श्रद्धा ओम त्रिवेदी।
जयपुर /सवाई माधोपुर। भारत के 26वें मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) श्री ज्ञानेश कुमार ने पदभार ग्रहण करने के एक महीने में चुनाव आयुक्त डॉ. सुखबीर सिंह संधू और डॉ. विवेक जोशी के साथ मिलकर सभी मतदाताओं की भागीदारी को बढ़ावा देने और उन्हें मतदान केंद्रों पर सुखद अनुभव सुनिश्चित करवाने के लिए बीएलओ स्तर तक चुनाव तंत्र में आवश्यक बदलाव की योजना बनाई है। इसमें राजनीतिक दलों को प्रमुख हितधारक होने के नाते जमीनी स्तर पर शामिल किया जा रहा है।
आयोग का स्पष्ट मत है कि लगभग 100 करोड़ मतदाता लोकतंत्र के स्तंभ हैं। इनकी भागीदारी बढ़ाने और इसमें सहजता लाने के क्रम में कई प्रयास किए जा रहे हैं। आयोग ने पूरे देश में मतदाता पहचान-पत्र (ईपीआईसी) नंबरों में दोहराव (डुप्लीकेसी) के दशकों पुराने मुद्दे को 3 महीने के भीतर समाप्त करने का संकल्प लिया है। इसके लिए जन्म और मृत्यु पंजीकरण अधिकारियों के साथ समन्वय कर मतदाता सूची को नियमित रूप से अद्यतन किया जाएगा। राजनीतिक दलों के साथ आयोग की बातचीत में भी यह स्पष्ट किया गया कि प्रारूप (ड्राफ्ट) मतदाता सूचियों में कोई नाम जोड़ने या हटाने की प्रक्रिया के लिए जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 में सभी राजनीतिक दलों के लिए उपलब्ध दावों और आपत्तियों को दर्ज करने के लिए प्रासंगिक कानूनी प्रावधानों के तहत अपील की जा सकती हैं। ऐसी अपीलों के अभाव में, मतदाता रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (ईआरओ) द्वारा तैयार की गई सूची मान्य होती है। यह उल्लेखनीय है कि 6-10 जनवरी, 2025 तक विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (एसएसआर)- 2025 की प्रक्रिया पूरी होने के बाद 7 मार्च, 2025 तक केवल 89 प्रथम अपील और एकमात्र दूसरी अपील दर्ज की गई है। मतदाता सूचियों को त्रुटि रहित करने के लिए अब जल्द ही ईसीआई और राष्ट्रीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) के विशेषज्ञों के बीच तकनीकी परामर्श किया जाएगा।