चित्तौड़गढ़ जिला अभिभाषक संस्थान के पूर्व अध्यक्ष ने कहा वतर्मान अध्यक्ष ने झूठा मामला दर्ज करवाया, न्यायालय की शरण लेंगे।

वीरधरा न्यूज़। चित्तौड़गढ़ @ डेस्क।
चित्तौड़गढ़। जिला अभिभाषक संस्थान के पूर्व अध्यक्ष एडवोकेट जसवंत सिंह राठौड़ ने वर्तमान अध्यक्ष द्वारा उनके विरुद्ध दर्ज करवाए गबन के मामले को पूरी तरह झूठा बताते हुए इसके विरुद्ध न्यायालय की शरण लेने की बात कही है।
पूर्व जिला अभिभाषक संस्थान अध्यक्ष एडवोकेट जसवंत सिंह ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर बताया कि वर्तमान अध्यक्ष महेन्द्र सिंह मेड़तिया ने कुछ अधिवक्ताओं के साथ मिलकर उनके विरुद्ध मुकदमों की रंजिश के चलते यह प्रकरण दर्ज कराया है, जबकि उनके द्वारा कभी भी संस्थान के खाते से राशि निकाल दुरुपयोग नहीं किया गया है। उनका कार्यकाल वर्ष 2019 में समास होने के बाद तत्कालीन कोषाध्यक्ष उमाशंकर द्वारा सारे बिल बाउचर व हिसाब बना कर नवनियुक्त संस्थान अध्यक्ष को दे दिया गया था। वर्तमान कोषाध्यक्ष ने 2020 की उनकी वार्षिक सदस्यता शुल्क की रसीद नहीं काटने पर उनके द्वारा अध्यक्ष को लिखित में सूचना दी गई कि उनके कार्यकाल एवं नये न्यायालय परिसर के उद्घाटन को लेकर किसी प्रकार की कोई राशि निकलती है तो वह उक्त राशि जमा कराने को सहर्ष तैयार हैं। इसके बावजूद भी व्यक्तिगत रंजिश के चलते बिना किसी सूचना व नोटिस के उक्त प्रकरण दर्ज करा उनक़ी छवि खराब करने का प्रयास किया जा रहा है।
राठौड़ ने प्रेस विज्ञसि में बताया कि उन्होने वर्तमान अध्यक्ष से वर्ष 2017 और 2018 के बिल बाउचर उपलब्ध कराने की मांग की थी जिससे वह सीए से ऑडिट करा वर्ष 2019 का हिसाब संस्थान के समक्ष प्रस्तुत कर सकें। इसके बावजूद भी संस्थान द्वारा किसी प्रकार से बिल बाउचर उन्हे उपलब्ध नहीं कराये गए।
राठौड़ ने बताया कि उनके अध्यक्ष चुनने के बाद पहली बैठक में ही वर्ष 2017-18 की ऑडिट जल्द से जल्द कराने का प्रस्ताव लिया गया था, लेकिन काफी प्रयास के बावजूद भी उक्त दस्तावेज उपलब्ध नहीं हुए। इस पर हमारी कार्यकारिणी ने तीन वरिष्ठ अधिवक्ताओं की समिति गठित की गई लेकिन फिर भी वर्षे 2017-18 का हिसाब संस्थान में नहीं मिला जिस कारण ऑडिट नहीं हो पाई थी। अभी वर्ष 2017 और वर्ष 2018 के वर्तमान अध्यक्ष ने ऑडिट कराई तो वर्ष 2017 में 1 लाख 36 हजार 294 रुपये और वर्ष 2018 में 2 लाख 38 हजार 500 रुपये बिना प्रस्ताव लिये खर्च करने की जानकारी मिली। वर्तमान अध्यक्ष और कार्यकारिणी ने पूर्व कार्यकारिणी को राहत देते हुए उक्त बिना प्रस्ताव खर्च की गई राशि का समायोजन कर लिया गया। उनके कार्यकाल 2019 में नववीन न्यायालय परिसर के भव्य उद्धाटन को लेकर कोई राशि अधिक खर्च की है तो उसके बिल बाउचर व हिसाब किताब संस्थान को दे दिया गया है। उन्होने बताया कि इस कार्यक्रम उन्होने करीब 5 लाख रुपये निजी तौर खर्च किए थे। राठौड़ ने बताया कि इस सब के बाद भी उन्होने वर्तमान अध्यक्ष को बिना प्रस्ताव लिए खर्च की गई राशि जमा कराने के लिए लिखित में प्रार्थना पत्र देने के बाद भी उन्होने राशि जमा नहीं की और उनके विरुद्ध झुठा प्रकरण दर्जे करावा दिया है। उन्होंने बताया कि इसके विरुद्ध न्यायालय की शरण ली जायेगी।