जेब में रखें मोबाइल, पर पहले चेहरे पर रखें स्माइल – राष्ट्रसंत श्री ललित प्रभ

वीरधरा न्यूज़। शंभूपुरा। डेस्क
सोमवार को चित्तौड़गढ़ के रणकपुर मार्बल में संतों का रहेगा प्रवास
शंभूपुरा, 20 दिसंबर। राष्ट्रसंत श्री ललित प्रभ जी ने कहा कि खुशियाँ किसी के बाप की नहीं, अपने आपकी होती है। अगर हमारा फैसला है कि मैं हर हाल में खुश रहूँगा तो दुनिया की कोई ताकत हमें नाखुश नहीं कर सकती। उन्होंने कहा कि आनंद हमारा स्वभाव है इसलिए खाने को मिल जाए तो खाने का आनंद लें और न मिले तो उपवास का आनंद लें, चलें तो यात्रा आनंद लें और बैठें तो आनंद की यात्रा करें। शादी हो जाए तो संसार का आनंद लें और न हो तो शील का आनंद लें। व्यक्ति को हर परिस्थिति का आनंद लेने की कला सीख लेनी चाहिए। जो अपने आपको किसी भी हालत में प्रभावित होने नहीं देता वह सदा खुश रहता है।
संतप्रवर जैन स्थानक में भाई बहनों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि जेब में भले ही रखें मोबाइल पर पहले चेहरे पर लेकर आए स्माइल। जीवन में कब क्या हो जाए इसका कोई अता-पता नहीं है। उन्होंने कहा कि घर-परिवार के लोग तो जैसे हैं वैसे ही रहेंगे, इसलिए उनके सुधारने की भूल न करें। पूरी दुनिया को सुधारने का ठेका न तो भगवान का है न हमारा, पर अगर हमने खुद को सुधार लिया तो सदा खुश रहने में सफल हो जाएंगे।
सहजता से जिएँ – खुश रहने का पहला मंत्र देते हुए संतश्री ने कहा कि दुनिया में जो मिला है, जैसा मिला है, उसका स्वागत करना सीखें। अगर बेटा कहना माने तो ठीक और न कहना मानें तो सोचें कि रोज-रोज कहने की झंझट समाप्त हो गई। हमें कहीं सम्मान मिलने वाला, पर उसके बदले अपमान मिल जाए तो उसे सहजता से स्वीकार कर लें। उदाहरण के माध्यम से समझाते हुए संतश्री ने कहा कि कभी जीवन में सुख आए तो समझना चाचाजी आए हैं वे सौ का खाएँगे और पाँच सौ देकर के जाएंगे और दुख आए तो समझना दामाद आया है, दो सौ का खाएगा और ऊपर से हजार लेकर जाएगा। फिर भी हम चाचा से ज्यादा खुश दामाद के आने पर होते हैं। इसलिए जीवन में सुख आए तो कहिए वेलकम, पर दुख आए तो कहिए मोस्ट वेलकम।
हर हाल में संतुष्ट रहें: खुश रहने का दूसरा मंत्र देते हुए संतश्री ने कहा कि भगवान ने हमें हमारे भाग्य से ज्यादा दिया है इसलिए भाग्य का रोना रोने की बजाय हर हाल में संतुष्ट रहें और जो मिला है उसके लिए भगवान को शुक राना अदा करें।
हमेशा मुस्कुराते हुए जिएँ: खुश रहने के तीसरे मंत्र में संतश्री ने कहा कि मुस्कुराता हुआ चेहरा दुनिया का सबसे खूबसूरत चेहरा होता है। काला व्यक्ति भी जब मुस्कुराता है तो बहुत सुंदर लगता है, और गौरा अगर मुँह लटकाकर बैठ जाए तो बहुत भद्दा दिखने लग जाता है। इसलिए हर दिन की शुरुआत मुस्कुराते हुए करें। उदाहरण से सीख देते हुए संतप्रवर ने कहा कि जब हम फोटोग्राफर के सामने पांच सैकंड मुस्कुराते हैं तो हमारा फोटो सुंदर आता है और हम अगर हर पल मुस्कुराएंगे तो सोचो हमारी जिंदगी कितनी सुंदर बन जाएगी।
इससे पूर्व संत ललित प्रभ जी और मुनि शांतिप्रिय सागर जी का शंभूपुरा जैन महावीर स्वाध्याय भवन पहुंचने पर समाज के श्रद्धालुओं द्वारा स्वागत किया गया।
संघ के हस्तीमल सिसोदिया व सुनील मेहता ने बताया कि संत प्रवर सोमवार को चित्तौड़गढ़ के रणकपुर मार्बल में प्रवास करेंगे।

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