राजनीतिक दांव-पेंच से परे होकर मुख्यमंत्री राजस्थान सरकार की कोरोना बचाव सम्बन्धी नीति को स्पष्ट करें: डाॅ. अलका गुर्जर

जनता पर कोरोना कहर ढहा रहा है, कांग्रेस का आपसी अंतर्द्वंद ही खरीद-फरोख्त की कड़वी सच्चाई को सामने ला रहा है: डाॅ. अलका गुर्जर

वीरधरा न्यूज़।जयपुर @ श्री राहुल भारद्वाज

जयपुर । कोरोना जैसी वैश्विक आपदा के कहर से जूझ रही राजस्थान की जनता को राहत हेतु उचित कदम उठाने की जगह सत्तालिप्सा के अंतर्द्वंद में उलझी कांग्रेस के विधायक महेंद्रजीत सिंह मालवीय के द्वारा बीटीपी विधायकों पर कांग्रेस का समर्थन करने के लिए 10-10 करोड़ रुपए की रिश्वत लेने सम्बन्धी आरोप का वीडियो वायरल होने पर भाजपा की राष्ट्रीय मंत्री डाॅ. अलका गुर्जर ने प्रहार करते हुए कहा कि यह निर्लज्जता की पराकाष्ठा है कि इस कोरोनाकाल में मासूम जनता की देखभाल हेतु सरकार नजर नहीं आ रही है और इस सत्ताधारी कांग्रेस के ही पूर्व मंत्री और जिम्मेदार विधायक इनकी काली करतूतों की सच्चाई जनता के सामने ला रहे हैं।

डाॅ. गुर्जर ने कहा कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत मुहावरों की राजनीति करने की जगह जनता को स्वयं बताएं कि बकरे, घोड़े, कौन है और उनका संचालक कौन है?

डाॅ. गुर्जर ने कहा कि महेन्द्रजीत मालवीय वरिष्ठ विधायक हैं और यह भी सब को ज्ञात है कि बीटीपी के विधायकों ने राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस को वोट दिया और फिर कांग्रेस के ही दो ध्रुवों की सत्तासुख के लिए आपसी खींचतान में ये बीटीपी विधायक मुख्यमंत्री के साथ फाइव स्टार सुख के लाभार्थी भी हो गए थे। अब कांग्रेस के ही वरिष्ठ विधायक पूर्व मंत्री मालवीय अन्तर्मन की आवाज पर कड़वी सच्चाई का खुलासा कर रहे हैं तो फिर मुख्यमंत्री अपनी चिर-परिचित शैली में इसका आरोप भी विपक्ष पर मंड रहे हैं।

डाॅ. अलका गुर्जर ने अपने बयान में यह भी कहा कि मुख्यमंत्री गहलोत ने मेरे प्रश्न उठाने पर यह तो कह दिया कि रघु शर्मा स्वास्थ्य मंत्री के रूप में अस्पताल का निरीक्षण कर सकते हैं लेकिन मेरा फिर यह प्रश्न है कि राजनीतिक दांव-पेंच से परे होकर मुख्यमंत्री अपनी और सरकार की कोरोना बचाव सम्बन्धी नीति को स्पष्ट करें और बताएं कि रघु शर्मा की तरह अन्य संक्रमित मरीज भी अस्पताल परिसर में खुलेआम घूम सकते हैं या नहीं???

डाॅ. गुर्जर ने कहा कि उचित कार्यवाही करने की जगह अपने मंत्री के उठाये गलत कदम के पक्ष में बयान देना मुख्यमंत्री महोदय को शोभा नहीं देता यह उनके पद की गरिमा के अनुकूल नहीं है।

डाॅ. गुर्जर ने कहा कि इतनी ही चिंता अगर है तो स्वस्थ रहते हुए स्वास्थ्य मंत्री क्यों नहीं अस्पतालों का निरीक्षण करने गये और जब खुद संक्रमित मरीज हो गए तो अन्य मरीजों के परिजनों और रोगियों की सेवा में लगे स्वास्थ्य कर्मियों को खतरे में क्यों डाला? इसका जवाब मुख्यमंत्री को देना चाहिए ।